साहित्य संचय केवल एक प्रकाशन संस्थान का नाम नहीं, यह एक अभियान है जो वर्ष 2008 में शुरू हुआ। इस अभियान का उद्देश्य साहित्य को समाज तक लाना और प्रतिभाशाली लेखकों को एक मंच उपलब्ध करवाना था। साथ ही बिना व्यावसायिक लाभ हानि के भारतीय भाषाओँ की सेवा करना है। इस प्रतिस्पर्धा के युग में प्रकाशकों के सरोकार बदल गए हैं। आज का प्रकाशन यह नहीं जानना चाहता की पाठक क्या पढना चाहता है। स्वास्थ्य मनोरंजक और ज्ञानपरक सामग्री के साथ साहित्य संचय प्रकाशन समय से संवाद करता हुआ आपके समक्ष उपस्थित है। हम समय की धडकनों के आवाज आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपसे यह बात साझा करते हुए संतोष का अनुभव हो रहा है कि इतने कम समय में साहित्य संचय ने बौधिक वर्ग में अपनी एक खास पहचान बनाई है। युवाओं और प्रतिष्ठित रचनाकारों के इस संयुक्त समागम में हमने देश की सीमाओं को लांघकर वैश्विक स्तर पर अपने प्रकाशन को स्थापित किया है। साहित्य की निरंतर सेवा करते हुए आज नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी साहित्य संचय प्रकाशन अपना काम बखूबी कर रहा है। जल्दी ही यह प्रकाशन संस्थान विश्व के अन्य देशों में भी अपनी सेवाएँ देगा। सधन्यवाद